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लिपि केवल लिखने का माध्यम नहीं, बल्कि किसी भी समाज की आत्मा और उसकी अस्मिता का प्रतीक होती है- द्रौपदी मुर्मू Script is not just a medium of writing, but a symbol of the soul and identity of any society - Draupadi Murmu

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लिपि केवल लिखने का माध्यम नहीं, बल्कि किसी भी समाज की आत्मा और उसकी अस्मिता का प्रतीक होती है- द्रौपदी मुर्मू Script is not just a medium of writing, but a symbol of the soul and identity of any society - Draupadi Murmu
जमशेदपुर : लिपि केवल लिखने का माध्यम नहीं, बल्कि किसी भी समाज की आत्मा और उसकी अस्मिता का प्रतीक होती है।


संताली भाषा की अपनी लिपि 'ओलचिकी' के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जमशेदपुर के करनडीह में ऑल इंडिया संताली राइटर्स एसोसिएशन एवं दिशोम जाहिरथान कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भव्य शताब्दी समारोह में उपरोक्त बातें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कही। उन्होंने पंडित रघुनाथ मुर्मू के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि उनके विजन ने संताल समाज को विश्व पटल पर एक नई पहचान दी है। कहा कि 1925 में जब पंडित रघुनाथ मुर्मू ने इस लिपि का आविष्कार किया था, तब उन्होंने आने वाली कई शताब्दियों का भविष्य लिख दिया था। उन्होंने गुरु गोमके के योगदान को अतुलनीय बताते हुए कहा कि संताली समाज आज अगर गर्व के साथ सिर उठाकर खड़ा है, तो उसमें ओलचिकी लिपि का सबसे बड़ा योगदान है। राष्ट्रपति ने भावुक होते हुए कहा कि एक आदिवासी समाज की बेटी होने के नाते इस गौरवशाली पल का हिस्सा बनना उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी अत्यंत सुखद है।

राष्ट्रपति ने नई शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा देना उनकी प्रतिभा को निखारने का सबसे सशक्त जरिया है। उन्होंने आह्वान किया कि संताली समाज अपनी लिपि का उपयोग न केवल बोलचाल में, बल्कि आधुनिक ज्ञान-विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी करे। उन्होंने कहा कि जब कोई भाषा लिपिबद्ध होती है तो उसका साहित्य और संस्कृति अमर हो जाती है। अपने संबोधन में द्रौपदी मुर्मू ने इस बात पर खुशी जाहिर की कि ओलचिकी अब केवल दीवारों या कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि कंप्यूटर और मोबाइल के की-बोर्ड पर भी अपनी जगह बना चुकी है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल दुनिया में और अधिक मजबूती से स्थापित करें। राष्ट्रपति ने कहा कि हमें गर्व होना चाहिए कि हमारी लिपि प्रकृति की ध्वनियों से निकली है, जो पर्यावरण और मनुष्य के गहरे संबंधों को दर्शाती है। शताब्दी समारोह के दौरान पूरा करनडीह क्षेत्र संताली गौरव के रंग में रंगा नजर आया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर हजारों की संख्या में जुटे लोगों ने अपनी राष्ट्रपति का स्वागत किया। इस दौरान राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में ओलचिकी के प्रचार-प्रसार में लगे विद्वानों और साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया। तत्पश्चात, राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इससे पूर्व सोनारी एयरपोर्ट पर महामहिम राष्ट्रपति के पहुंचने पर राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा उनका स्वागत किया गया। साथ ही, जमशेदपुर के उपायुक्त की ओर से भी गुलदस्ता भेंट कर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का स्वागत किया गया।

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THE LIVE BHARAT पर प्रकाशित

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