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शिक्षा संस्थान केवल शिक्षा और डिग्री प्रदान करने के केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रमुख अनुसंधान केंद्र और 'बौद्धिक प्रयोगशालाएं' भी हैं: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्म Educational institutions are not just centres for imparting education and degrees, but are also premier research centres and 'intellectual laboratories' of the nation: President Draupadi Murmu

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शिक्षा संस्थान केवल शिक्षा और डिग्री प्रदान करने के केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रमुख अनुसंधान केंद्र और 'बौद्धिक प्रयोगशालाएं' भी हैं: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्म Educational institutions are not just centres for imparting education and degrees, but are also premier research centres and 'intellectual laboratories' of the nation: President Draupadi Murmu
सरायकेला : एनआईटी जमशेदपुर के 13वें दीक्षा समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान युग में तकनीकी परिवर्तन की गति शायद अभूतपूर्व है। ये परिवर्तन नए अवसर तो पैदा कर रहे हैं, साथ ही नई चुनौतियाँ भी जन्म दे रहे हैं। तकनीकी प्रगति शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य सेवा, संचार और ऊर्जा उत्पादन में परिवर्तन ला रही है। हालांकि, आधुनिक तकनीकों के दुरुपयोग से साइबर अपराध और ई-कचरे से पर्यावरण को होने वाला नुकसान बढ़ रहा है। एनआईटी जमशेदपुर जैसे प्रमुख हितधारकों से अपेक्षा की जाती है कि वे आम जनता और समाज पर आधुनिक तकनीकों के नकारात्मक प्रभावों को नियंत्रित करने और कम करने में भाग लें। उन्हें न केवल समाधान खोजने चाहिए, बल्कि इन समाधानों को स्थायी और टिकाऊ बनाने के लिए अन्य संस्थानों और उद्योगों के साथ सहयोग भी करना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षण संस्थान केवल शिक्षा और डिग्री प्रदान करने के केंद्र नहीं हैं, बल्कि ये राष्ट्र के प्रमुख अनुसंधान केंद्र और बौद्धिक प्रयोगशालाएँ भी हैं। यहीं पर देश के भविष्य की परिकल्पना आकार लेती है। राष्ट्रीय शिक्षा संस्थानों (एनआईटी) जैसे संस्थानों से शिक्षित इंजीनियरों को राष्ट्र निर्माता की भूमिका निभानी चाहिए, जो तकनीकी प्रगति का उपयोग मानव कल्याण के साधन के रूप में करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी उच्च शिक्षा संस्थान की प्रतिष्ठा का आकलन केवल उसकी रैंकिंग या दाखिले के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि संस्थान और उसके छात्रों द्वारा समाज और राष्ट्र के प्रति किए गए योगदान के आधार पर भी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत का निर्माण करना है। अनुसंधान, नवाचार और जीवंत स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना तथा युवाओं को कुशल कार्यबल में विकसित करना इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एवं माध्यमिक शिक्षा संस्थानों (एनआईटी) जैसे अग्रणी संस्थानों को अनुसंधान और नवाचार पर और अधिक ध्यान देना चाहिए। उनके योगदान से भारत 'ज्ञान महाशक्ति' के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर सकेगा। समारोह में कुल 1,114 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गई, जिनमें से 612 छात्र व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे। आंकड़ों के अनुसार 417 स्नातक, 149 स्नातकोत्तर और 46 पीएचडी शोधार्थियों को प्रमाणपत्र दिए गए. शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए एमएससी (भौतिकी) के कृष्णाशिष मंडल (9.64 CGPA) और बी.टेक (इलेक्ट्रिकल) के प्रियांशु राज (9.52 CGPA) को राष्ट्रपति के हाथों गोल्ड मेडल प्राप्त हुआ। इस अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, मंत्री दीपक बिरुवा सहित कई गणमान्य अतिथि, शिक्षाविद और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।


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THE LIVE BHARAT पर प्रकाशित

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