बोकारो : आगामी शुक्रवार, 01 मई को माता गंधेश्वरी पूजा का धूमधाम से आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी देते हुए गंधबनिक समाज चास बोकारो के सक्रिय सदस्य गौतम कुमार लाहा ने कहा कि यह हड़प्पा और मोहनजोदड़ो काल में गंधबनिक समुदाय का वर्णन हैं। बताया कि गंधबनिक एक बंगाली हिंदू व्यापारी समुदाय है जो मुख्य रूप से परफ्यूमरी (perfumes) का कारोबार करते हैं। सुगंधित उत्पाद जैसे विभिन्न इत्र, धूप, मसाले साथ ही साथ खाद्य पदार्थों एवं देश-विदेश के मसाले आदि। चीनी पर्यटक फाह्यान सुगंधित समुदाय को हिंदू व्यापारी समुदाय कहते हैं। माता गंधेश्वरी इस सुगंधित समुदाय की कुल देवी हैं। हर साल बैशाखी पूर्णिमा पर, गंधबनी व्यापारी देवी गंधेश्वरी की पूजा करते हैं। गंधेश्वरी मातृ शक्ति का प्रतीक है। गंधबनिक शुरू में शैववाद यानी शिव के उपासक थे, लेकिन बाद में शक्ति के उपासक बन गए।
प्राचीन काल में व्यापारी व्यापार में मोरों की सवारी करते थे। रास्ते में आंधी, बारिश, बाढ़ आदि की आशंका थी। लुटेरों और जंगली जानवरों का भी डर था। गंधेश्वरी इन सब से उनकी रक्षा करेंगी, इसी मान्यता से गंधेश्वरी की पूजा शुरू होती है। बताया कि गंधेश्वरी मातृशक्ति का प्रतीक है। देवी गंधेश्वरी के ध्यान मंत्र में कहा गया है- 'दुर्गा दुर्गातिहारिणी भबतु ना', जिसका अर्थ है 'हे देवी, आप हमारे लिए दुर्गातिहारिणी दुर्गा स्वरूप हैं। दुर्गातिहारिणी दुर्गा के रूप में हमारे दुखों का नाश करें।' इस दिन सुगंधित समुदाय के व्यापारियों ने देवी के सामने अपना लेखा और तौल यंत्र स्थापित किया। इस दिन गंधेश्वरी की कृपा से वर्ष भर व्यापार की समृद्धि की कामना की जाती है।





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