# मामला : समझौते के 11 सालों बाद भी नियोजन अघोषित रोक पर होनी थी वार्ता
जादूगोड़ा : यूसिल की जादूगोड़ा कंपनी प्रबंधन ने शनिवार को नरवा पहाड़ विस्थापित कमेटी को थोड़ा भी तब्बजो नहीं दी। आलम यह रहा कि विस्थापितों को वार्ता के लिए आमंत्रित कर खुद बैठक से भाग रही। अंत में बिना बैठक के ही नरवा पहाड़ विस्थापित कमे टी के सदस्य निराश होकर वापस लौट गए। उनके चेहरे पर गुस्सा साफ दिख रहा था। बैठक को लेकर कंपनी प्रबंधन के नकारात्मक रुख के बाद दोपहर एक बजे के बाद कंपनी हॉल से सभी बाहर निकल गए। इस बाबत विस्थापित कमेटी के अध्यक्ष बुधराय किस्कू ने कहा कि कंपनी प्रबंधन को वार्ता करना ही नहीं था तो क्यों बुलाया? जबकि कंपनी प्रबंधन वर्ष 2014 व वर्ष 2023 में विस्थापितों के साथ हुए समझौते को लेकर पत्र जारी कर वार्ता हेतु शनिवार को जादूगोड़ा में बैठक बुलाई थी। इसी बैठक में विस्थापितों के हित में 11 साल पूर्व हुए समझौते में विस्थापित परिवारों को हर साल नियोजन, मृतक के आश्रितों को नौकरी, सेवानिवृत विस्थापित परिवार को पीढ़ी दर पीढ़ी नौकरी के वायदे पर चर्चा होनी थी ताकि विस्थापितों का लटका हक हासिल हो सके। विस्थापितों के नियोजन के मुद्दे पर आयोजित बैठक में मिलने गए प्रतिनिधिमंडल में अध्यक्ष बुधराई किस्कू, महासचिव मोचीराम सोरेन, माझी बाबा युवराज टुडू, पर्वत किस्कू ( माझी बाबा मुर्गाघुटू), मदन मोहन दास, गणेश मार्डी, बुडान मुर्मू, सोमाय हांसदा, खेलाराम मुर्मू, दीपक कुमार सिंह आदि ने शिरकत किया था।





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