••रूढ़ि परंपरा के आधार पर बने पेसा नियमावली- सिद्धश्वर सरदार
जादूगोड़ा : माझी परगना महाल और भूमिज मुंडा ने राज्य सरकार की पेसा कानून में बदलाव की मांग को लेकर शुक्रवार को गालूडीह बराज में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने 'हमारा गांव में हमारा राज' के नारे भी लगाए। इससे पूर्व गालूडीह, घाटशिला, जादूगोड़ा, पोटका आदि क्षेत्रों से भारी संख्या में आए माझी बाबा व ग्राम प्रधान की बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता माझी परगना महाल देश विचारक बहादुर सोरेन ने की। इस अवसर पर सिद्धेश्वर सरदार, हरीश सिंह भूमिज व सुधीर सोरेन ने कहा कि जल्द ही गांव-गांव में पेसा कानून की खामियों को लेकर भ्रमण करेंगे और ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा। इस दौरान समाज के विचारों को एकत्रित कर संशोधित पेसा कानून का ड्राफ्ट झारखंड के राज्यपाल, मुख्यमंत्री व राष्ट्रपति को सौंपी जाएगी। इस अवसर पर सिद्धेश्वर सरदार ने कहा कि पेसा कानून रूढ़ि परपंरा, सामाजिक आधार व सामुदायिक प्रबंधन के तहत बने जिसे आदिवासी समाज स्वीकार करेगा, जबकि राज्य सरकार के पेसा कानून में रूढ़ि परम्परा के तहत नियमावली नहीं बनी है। जिसकी वजह से पूरे राज्य में पेसा कानून के विरोध के स्वर उठ रहे है। उनकी मांग है 1996 में केन्द्र सरकार के पेसा कानून को सख्ती से लागू किया जाए। ग्राम सभा का निर्णय सर्वोपरि होगा जबकि राज्य सरकार के पेसा कानून को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। पारंपरिक ग्राम सभा को उपायुक्त के अधीन कर दिया गया है। जबकि जल, जंगल जमीन पर संरक्षण का अधिकार ग्राम सभा का होना है। ग्राम सभा के ऊपर कोई समिति सर्वोपरि नहीं मानी जाएगी। हर फैसले ग्रामसभा माझी खुद लेगा।





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